प्रश्न और अभ्यास (ପ୍ରଶ୍ନ ଓ ଅଭ୍ୟାସ)
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए ।
(ନିମ୍ନଲିଖିତ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର
ଉତ୍ତର ଦୁଇ-ତିନୋଟି ବାକ୍ୟରେ ଦିଅ ।)
(क) कर्मयोगी होने पर कौन-सा फायदा मिलता है ?
(କର୍ମଯୋଗୀ ହେଲେ କେଉଁ ଲାଭ
ମିଳିଥାଏ ?)
उत्तर: कर्मयोगी अपने पसीने से रोटी कमाता है,
जिससे वह धर्म-पुरुष बन जाता है। उसके जीवन में पाप का आसानी से प्रवेश नहीं हो पाता और कठिन परिश्रम के कारण उसे रात में गहरी नींद आती है।
(ଉତ୍ତର: କର୍ମଯୋଗୀ ନିଜ
ଝାଳବୁହା ପରିଶ୍ରମରେ ରୋଟି ରୋଜଗାର କରେ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ସେ ଧର୍ମ-ପୁରୁଷ ହୋଇଯାଏ। ତା’ ଜୀବନରେ ପାପ ସହଜରେ ପ୍ରବେଶ କରିପାରେ ନାହିଁ
ଏବଂ କଠିନ ପରିଶ୍ରମ ଯୋଗୁଁ ତାକୁ ରାତିରେ ଗଭୀର ନିଦ ହୁଏ ।)
(ख) फुरसती लोगों को कर्मयोगी क्यों कहा नहीं जा सकता ?
(ଅବସରପ୍ରାପ୍ତ ବା ଖାଲି
ବସୁଥିବା ଲୋକଙ୍କୁ କର୍ମଯୋଗୀ କାହିଁକି କୁହାଯାଇପାରିବ ନାହିଁ ?)
उत्तर: फुरसती लोग श्रम से बचते हैं और उनके पास खाली समय बहुत होता है। जहाँ समय फालतू पड़ा रहता है,
वहाँ शैतान का वास होता है और उनके जीवन में पाप बढ़ने लगता है, इसलिए वे कर्मयोगी नहीं हो सकते।
(ଉତ୍ତର: ଅବସରପ୍ରାପ୍ତ ଲୋକମାନେ
ଶ୍ରମରୁ ଦୂରେଇ ରହନ୍ତି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ପାଖରେ ବହୁତ ବାଜେ ସମୟ ଥାଏ। ଯେଉଁଠାରେ ବଳକା ସମୟ ଥାଏ, ସେଠାରେ ଶୟତାନର ବାସ ହୋଇଥାଏ
ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ଜୀବନରେ ପାପ ବଢ଼ିବାକୁ ଲାଗେ, ତେଣୁ ସେମାନେ କର୍ମଯୋଗୀ ହୋଇପାରିବେ ନାହିଁ ।)
(ग) देहाती लोग अपने बच्चों को तालीम देने की बात क्यों करते हैं ?
(ଗ୍ରାମୀଣ ଲୋକମାନେ ନିଜ
ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଶିକ୍ଷା ଦେବା କଥା କାହିଁକି କହନ୍ତି ?)
उत्तर: देहाती लोग चाहते हैं कि उनके बच्चों को तालीम मिले ताकि उन्हें नौकरी मिल सके। वे सोचते हैं कि नौकरी मिलने के बाद उनके बच्चों को उनकी तरह दिन भर कड़ी मेहनत या मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी।
(ଉତ୍ତର: ଗ୍ରାମୀଣ ଲୋକମାନେ
ଚାହାଁନ୍ତି ଯେ ସେମାନଙ୍କ ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଶିକ୍ଷା ମିଳୁ ଯଦ୍ୱାରା ସେମାନଙ୍କୁ ଚାକିରି
ମିଳିପାରିବ। ସେମାନେ ଭାବନ୍ତି ଯେ ଚାକିରି ମିଳିବା ପରେ ସେମାନଙ୍କ ପିଲାମାନଙ୍କୁ ସେମାନଙ୍କ
ଭଳି ଦିନସାରା କଠିନ ପରିଶ୍ରମ ବା ମଜୁରୀ କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ ।)
(घ) भगवान् कृष्ण ने श्रम का आदर कैसे किया ?
(ଭଗବାନ କୃଷ୍ଣ ଶ୍ରମର ଆଦର
କିପରି କଲେ ?)
उत्तर: राजसूय यज्ञ में भगवान कृष्ण ने स्वयं काम माँगा। जब धर्मराज ने उन्हें कोई काम नहीं दिया, तो उन्होंने अपनी पसंद से जूठी पत्तलें उठाने और पोंछा लगाने का काम चुनकर श्रम के प्रति सम्मान प्रकट किया।
(ଉତ୍ତର: ରାଜସୂୟ ଯଜ୍ଞରେ ଭଗବାନ
କୃଷ୍ଣ ନିଜେ କାମ ମାଗିଥିଲେ। ଯେତେବେଳେ ଧର୍ମରାଜ ତାଙ୍କୁ କୌଣସି କାମ ଦେଲେ ନାହିଁ, ସେତେବେଳେ ସେ ନିଜ ପସନ୍ଦରେ
ଅଇଁଠା ପତ୍ର ଉଠାଇବା ଏବଂ ପୋଛା ମାରିବା କାମ ବାଛି ଶ୍ରମ ପ୍ରତି ସମ୍ମାନ ପ୍ରକଟ କଲେ ।)
(ङ) ज्ञानी और मजदूर में क्या फर्क होता है ?
(ଜ୍ଞାନୀ ଏବଂ ମଜୁର ମଧ୍ୟରେ କ’ଣ
ପାର୍ଥକ୍ୟ ଥାଏ ?)
उत्तर: समाज में यह धारणा बन गई है कि ज्ञानी केवल खा सकते हैं और आशीर्वाद दे सकते हैं, वे काम नहीं कर सकते। इसके विपरीत, मजदूर वह है जो दिन भर शारीरिक श्रम करता है और पसीने से रोटी कमाता है।
(ଉତ୍ତର: ସମାଜରେ ଏହି ଧାରଣା
ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଛି ଯେ ଜ୍ଞାନୀମାନେ କେବଳ ଖାଇପାରିବେ ଏବଂ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେଇପାରିବେ, ସେମାନେ କାମ କରିପାରିବେ
ନାହିଁ। ଏହାର ଓଲଟା, ମଜୁର ହେଉଛି ସେ ଯିଏ ଦିନସାରା
ଶାରୀରିକ ଶ୍ରମ କରେ ଏବଂ ଝାଳ ବୁହାଇ ରୋଟି ରୋଜଗାର କରେ ।)
(च) शारीरिक और दिमागी श्रम की प्रतिष्ठा कैसे बढ़ सकती है ?
(ଶାରୀରିକ ଏବଂ ମାନସିକ ଶ୍ରମର
ପ୍ରତିଷ୍ଠା କିପରି ବଢ଼ିପାରିବ ?)
उत्तर: जब दिमागी काम करने वाले लोग शारीरिक श्रम करेंगे और शारीरिक श्रम करने वाले लोग अपने दिमाग का उपयोग करेंगे, तभी दोनों की प्रतिष्ठा बढ़ेगी। इसके लिए दोनों प्रकार के कामों का मूल्य समान होना चाहिए।
(ଉତ୍ତର: ଯେତେବେଳେ ମାନସିକ କାମ
କରୁଥିବା ଲୋକମାନେ ଶାରୀରିକ ଶ୍ରମ କରିବେ ଏବଂ ଶାରୀରିକ ଶ୍ରମ କରୁଥିବା ଲୋକମାନେ ନିଜ ବୁଦ୍ଧିର
ବ୍ୟବହାର କରିବେ, ସେତେବେଳେ ହିଁ ଉଭୟଙ୍କ
ପ୍ରତିଷ୍ଠା ବଢ଼ିବ। ଏଥିପାଇଁ ଉଭୟ ପ୍ରକାରର କାମର ମୂଲ୍ୟ ସମାନ ହେବା ଉଚିତ ।)
2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए ।
(ନିମ୍ନଲିଖିତ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର
ଉତ୍ତର ଗୋଟିଏ ବାକ୍ୟରେ ଦିଅ ।)
(क) शेषनाग किसे कहा गया है ? (ଶେଷନାଗ କାହାକୁ କୁହାଯାଇଛି ?)
उत्तर: दिन भर शरीर-श्रम करने वाले मजदूरों को शेषनाग कहा गया है। (ଉତ୍ତର: ଦିନସାରା
ଶାରୀରିକ ଶ୍ରମ କରୁଥିବା ମଜୁରମାନଙ୍କୁ ଶେଷନାଗ କୁହାଯାଇଛି।)
(ख) कौन धर्म-पुरुष हो जाता है ? (କିଏ ଧର୍ମ-ପୁରୁଷ ହୋଇଯାଏ ?)
उत्तर: जो शख्स अपने पसीने से रोटी कमाता है, वह धर्म-पुरुष हो जाता है। (ଉତ୍ତର: ଯେଉଁ
ବ୍ୟକ୍ତି ନିଜ ଝାଳବୁହା ପରିଶ୍ରମରେ ରୋଟି ରୋଜଗାର କରେ, ସେ ଧର୍ମ-ପୁରୁଷ ହୋଇଯାଏ।)
(ग) किसके जीवन में पाप का आसानी से प्रवेश नहीं हो सकता ? (କାହା ଜୀବନରେ ପାପ ସହଜରେ ପ୍ରବେଶ କରିପାରେ ନାହିଁ ?)
उत्तर: जो दिन भर काम करता है, उसके जीवन में पाप का आसानी से प्रवेश नहीं हो सकता। (ଉତ୍ତର: ଯିଏ ଦିନସାରା କାମ କରେ, ତା' ଜୀବନରେ ପାପ ସହଜରେ ପ୍ରବେଶ
କରିପାରେ ନାହିଁ।)
(घ) किसे कर्मयोगी कहा जा सकता है ? (କାହାକୁ କର୍ମଯୋଗୀ କୁହାଯାଇପାରିବ ?)
उत्तर: जो कर्म को पूजा समझकर करता है,
उसे ही कर्मयोगी कहा जा सकता है। (ଉତ୍ତର: ଯିଏ କର୍ମକୁ ପୂଜା
ଭାବି କରେ, ତାକୁ ହିଁ କର୍ମଯୋଗୀ
କୁହାଯାଇପାରିବ।)
(ङ) फुरसती लोगों के जीवन में पाप क्यों दीखता है ? (ଅବସରପ୍ରାପ୍ତ ଲୋକଙ୍କ ଜୀବନରେ ପାପ କାହିଁକି ଦେଖାଯାଏ ?)
उत्तर: क्योंकि उनके पास समय फाजिल (फालतू) पड़ा रहता है,
जहाँ शैतान का काम शुरू होता है। (ଉତ୍ତର: କାରଣ ସେମାନଙ୍କ ପାଖରେ
ବଳକା ସମୟ ଥାଏ, ଯେଉଁଠାରେ ଶୟତାନର କାମ ଆରମ୍ଭ
ହୁଏ।)
(च) मजदूरों को नीच कौन समझता है ? (ମଜୁରମାନଙ୍କୁ ନୀଚ ବୋଲି କିଏ
ଭାବେ ?)
उत्तर: दिमागी काम करने वाले लोग मजदूरों को नीच समझते हैं। (ଉତ୍ତର: ମାନସିକ ବା
ବୁଦ୍ଧି କାମ କରୁଥିବା ଲୋକମାନେ ମଜୁରମାନଙ୍କୁ ନୀଚ ବୋଲି ଭାବନ୍ତି।)
(छ) किसने कहा कि सीता को दीप की बाती भी जलाने नहीं आती ? (କିଏ କହିଥିଲେ ଯେ ସୀତାଙ୍କୁ
ଦୀପର ସଳିତା ମଧ୍ୟ ଜଳାଇବା ଆସେ ନାହିଁ ?)
उत्तर: कौशल्या ने कहा कि सीता को दीप की बाती भी जलाने नहीं आती। (ଉତ୍ତର: କୌଶଲ୍ୟା କହିଥିଲେ ଯେ
ସୀତାଙ୍କୁ ଦୀପର ସଳିତା ମଧ୍ୟ ଜଳାଇବା ଆସେ ନାହିଁ।)
(ज) कृष्ण ने धर्मराज से क्या कहा ? (କୃଷ୍ଣ ଧର୍ମରାଜଙ୍କୁ କ’ଣ
କହିଥିଲେ ?)
उत्तर: कृष्ण ने कहा,
"मुझे भी काम दो,
क्या आदरणीय हैं तो क्या नालायक हैं!" (ଉତ୍ତର: କୃଷ୍ଣ କହିଥିଲେ, "ମତେ ମଧ୍ୟ କାମ ଦିଅ, ଆଦରଣୀୟ ବୋଲି କ’ଣ ଅଯୋଗ୍ୟ କି!")
(झ) ज्ञानी क्या नहीं कर सकते ? (ଜ୍ଞାନୀ କ’ଣ କରିପାରିବେ ନାହିଁ ?)
उत्तर: प्रचलित धारणा के अनुसार, ज्ञानी काम नहीं कर सकते। (ଉତ୍ତର: ପ୍ରଚଳିତ ଧାରଣା
ଅନୁଯାୟୀ, ଜ୍ଞାନୀ କାମ କରିପାରିବେ
ନାହିଁ।)
(ञ) कौन मजदूर कहलाएगा ? (କିଏ ମଜୁର ବୋଲାଇବ ?)
उत्तर: जो सवेरे उठकर पीसता है या शारीरिक श्रम करता है, वह मजदूर कहलाएगा। (ଉତ୍ତର: ଯିଏ ସକାଳୁ ଉଠି ପେଷଣ
କରେ ବା ଶାରୀରିକ ଶ୍ରମ କରେ,
ସେ ମଜୁର ବୋଲାଇବ।)
(ट) किसका जीवन धार्मिक नहीं होता ? (କାହା ଜୀବନ ଧାର୍ମିକ ହୁଏ ନାହିଁ ?)
उत्तर: जो काम टालते हैं या काम नहीं करते हैं,
उनका जीवन धार्मिक नहीं होता। (ଉତ୍ତର: ଯେଉଁମାନେ କାମକୁ
ଏଡ଼ାଇ ଦିଅନ୍ତି ବା କାମ କରନ୍ତି ନାହିଁ, ସେମାନଙ୍କ ଜୀବନ ଧାର୍ମିକ ହୁଏ ନାହିଁ।)
(ठ) हम काम की इज्जत नहीं करते तो कौन-सा कार्य खोते हैं ? (ଆମେ ଯଦି କାମକୁ ସମ୍ମାନ ନ ଦେଉ
ତେବେ କେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟ ହରାଉ ?)
उत्तर: हम एक बड़ा भारी धर्म-कार्य खोते हैं। (ଉତ୍ତର: ଆମେ ଏକ ବଡ଼
ଧର୍ମ-କାର୍ଯ୍ୟ ହରାଉ।)
(ड) ब्राह्मण को अपरिग्रही क्यों माना गया था ? (ବ୍ରାହ୍ମଣଙ୍କୁ ଅପରିଗ୍ରହୀ କାହିଁକି କୁହାଯାଉଥିଲା ?)
उत्तर: क्योंकि वह केवल धोती और खाने का अधिकारी था और विद्या बेचता नहीं था। (ଉତ୍ତର: କାରଣ ସେ
କେବଳ ଧୋତି ଏବଂ ଖାଦ୍ୟର ଅଧିକାରୀ ଥିଲେ ଏବଂ ବିଦ୍ୟା ବିକ୍ରି କରୁନଥିଲେ।)
(ढ) कब श्रम की प्रतिष्ठा होगी ? (କେବେ ଶ୍ରମର ପ୍ରତିଷ୍ଠା ହେବ ?)
उत्तर: जब हर कोई श्रम करेगा और कामों का मूल्य समान होगा, तब श्रम की प्रतिष्ठा होगी। (ଉତ୍ତର: ଯେତେବେଳେ
ପ୍ରତ୍ୟେକ ବ୍ୟକ୍ତି ଶ୍ରମ କରିବେ ଏବଂ କାମର ମୂଲ୍ୟ ସମାନ ହେବ, ସେତେବେଳେ ଶ୍ରମର ପ୍ରତିଷ୍ଠା
ହେବ।)
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में दीजिए ।
(ନିମ୍ନଲିଖିତ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର
ଉତ୍ତର ଗୋଟିଏ ଶବ୍ଦରେ ଦିଅ ।)
- (क) यह पृथ्वी किसके मस्तक पर स्थित है ? (ଏହି ପୃଥିବୀ କାହା ମସ୍ତକ
ଉପରେ ଅବସ୍ଥିତ ?) - शेषनाग (ଶେଷନାଗ)
- (ख) भगवान् ने किसे कर्मयोगी कहा है ? (ଭଗବାନ କାହାକୁ କର୍ମଯୋଗୀ କହିଛନ୍ତି ?) - मज़दूरों (ମଜୁରମାନଙ୍କୁ)
- (ग) अपने पसीने से कौन रोटी कमाता है ? (ନିଜ ଝାଳବୁହା ପରିଶ୍ରମରେ
କିଏ ରୋଟି ରୋଜଗାର କରେ ?)
- शख्स/मज़दूर (ବ୍ୟକ୍ତି/ମଜୁର)
- (घ) किसे कर्मयोगी कहा नहीं जा सकता ? (କାହାକୁ କର୍ମଯୋଗୀ କୁହାଯାଇପାରିବ ନାହିଁ ?) - श्रम टालने वाले को (ଶ୍ରମକୁ ଏଡ଼ାଇ ଯାଉଥିବା
ଲୋକକୁ)
- (ङ) जहां समय फाज़िल पड़ा होता है, वहां किसका काम शुरू हो जाता है ? (ଯେଉଁଠାରେ ବଳକା ସମୟ ଥାଏ, ସେଠାରେ କାହାର କାମ
ଆରମ୍ଭ ହୁଏ ?) - शैतान (ଶୟତାନ)
- (च) किन-किन लोगों के जीवन में पाप दिखता है ? (କେଉଁ ଲୋକଙ୍କ ଜୀବନରେ ପାପ ଦେଖାଯାଏ ?) - फुरसती (ଅବସରପ୍ରାପ୍ତ/ଖାଲି
ବସୁଥିବା)
- (छ) कौन कहता है कि उनके बच्चों को तालीम मिलनी चाहिए ? (କିଏ କହେ ଯେ ତାଙ୍କ
ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଶିକ୍ଷା ମିଳିବା ଉଚିତ ?) - देहाती (ଗ୍ରାମୀଣ ଲୋକ)
- (ज) राजसूय यज्ञ किसने किया था ? (ରାଜସୂୟ ଯଜ୍ଞ କିଏ
କରିଥିଲେ ?) - धर्मराज/युधिष्ठिर (ଧର୍ମରାଜ/ଯୁଧିଷ୍ଠିର)
- (झ) कौन-से श्रम की प्रतिष्ठा मानी गयी है ? (କେଉଁ ଶ୍ରମର ପ୍ରତିଷ୍ଠା
ମାନାଯାଇଛି ?) - दिमागी (ମାନସିକ/ବୁଦ୍ଧି କାମ)
- (ञ) दिमागी काम कौन करता था ? (ମାନସିକ କାମ କିଏ
କରୁଥିଲେ ?) - महात्मा गांधी/विद्वान (ମହାତ୍ମା
ଗାନ୍ଧୀ/ବିଦ୍ଵାନ)
- (ट) अपरिग्रही किसे माना गया था ? (ଅପରିଗ୍ରହୀ କାହାକୁ
କୁହାଯାଉଥିଲା ?) - ब्राह्मण (ବ୍ରାହ୍ମଣ)
- (ठ) बिना काम किये हमारा जीवन कैसा बनता है ? (ବିନା କାମରେ ଆମ ଜୀବନ
କିପରି ହୋଇଯାଏ ?) - पापी (ପାପୀ)
- (ड) किसका मूल्य समान होना चाहिए ? (କାହାର ମୂଲ୍ୟ ସମାନ ହେବା
ଉଚିତ ?) - कामों का/श्रम का (କାମର/ଶ୍ରମର)
भाषा ज्ञान (ଭାଷା ଜ୍ଞାନ)
1. 'ई' प्रत्यय के योग से बनने वाले शब्द:
(निबंध से खोजकर):
- खेती (खेत + ई)
- मज़दूरी (मज़दूर + ई)
- लाचारी (लाचार + ई)
- धार्मिक (धर्म + इक - यहाँ 'इक' है, 'ई' वाले शब्द हैं: सुखी, ज्ञानी, योगी)
- ई प्रत्यय वाले: देहाती, मज़दूरी, सुखी, ज्ञानी, योगी, निष्ठुरता (ता), बेकारी।
2. 'पर' परसर्ग का प्रयोग (वाक्य):
- पृथ्वी शेषनाग के मस्तक पर स्थित है।
- सबका आधार उन मज़दूरों पर है।
- मज़दूर खेतों पर काम करते हैं।
3. समास (तत्पुरुष):
- धर्म-पुरुष: धर्म का पुरुष
- धर्म-कार्य: धर्म का कार्य
- शरीर-श्रम: शरीर का श्रम
- राजसूय यज्ञ: राजसूय के लिए यज्ञ
4. मिश्र वाक्य:
वाक्य: "आज देहाती लोग भी कहते हैं कि हमारे बच्चों को तालीम मिलनी चाहिए।"
(यहाँ 'कि'
संयोजक है।)
5. विशेषता बताने वाले शब्द (विशेषण):
- धार्मिक जीवन
- देहाती लोग
- दिमागी काम
- सकारात्मक क्रान्ति
- मेधावी छात्र (विनोबा जी)