प्रश्न और अभ्यास (ପ୍ରଶ୍ନ ଓ ଅଭ୍ୟାସ)

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए

(ନିମ୍ନଲିଖିତ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ଦୁଇ-ତିନୋଟି ବାକ୍ୟରେ ଦିଅ ।)

() 'ममता' कहानी का सारमर्म अपने शब्दों में लिखिए

(‘ମମତା’ ଗଳ୍ପର ସାରମର୍ମ ନିଜ ଶବ୍ଦରେ ଲେଖ ।)

उत्तर: 'ममता' कहानी रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की विधवा पुत्री ममता के त्याग, कर्तव्यपरायणता और स्वाभिमान पर आधारित है उसने रिश्वत के सोने को ठुकरा दिया और शरण में आए शत्रु हुमायूँ को 'अतिथि देवो भव' की भारतीय परंपरा मानकर आश्रय दिया अंत में उसके त्याग की जगह केवल राजाओं का नाम इतिहास में दर्ज हुआ, जो भारतीय नारी के निःस्वार्थ चरित्र को दर्शाता है

(ଉତ୍ତର: ‘ମମତା’ ଗଳ୍ପଟି ରୋହତାସ ଦୁର୍ଗର ମନ୍ତ୍ରୀ ଚୂଡ଼ାମଣିଙ୍କ ବିଧବା କନ୍ୟା ମମତାର ତ୍ୟାଗ, କର୍ତ୍ତବ୍ୟପରାୟଣତା ଏବଂ ସ୍ୱାଭିମାନ ଉପରେ ଆଧାରିତ। ସେ ଲାଞ୍ଚର ସୁନାକୁ ପ୍ରତ୍ୟାଖ୍ୟାନ କରିଥିଲା ଏବଂ ଶରଣାଗତ ଶତ୍ରୁ ହୁମାୟୁନଙ୍କୁ ‘ଅତିଥି ଦେବୋ ଭବ’ର ଭାରତୀୟ ପରମ୍ପରା ମାନି ଆଶ୍ରୟ ଦେଇଥିଲା। ଶେଷରେ ତା’ର ତ୍ୟାଗ ସ୍ଥାନରେ କେବଳ ରାଜାମାନଙ୍କ ନାମ ଇତିହାସରେ ଲିପିବଦ୍ଧ ହେଲା, ଯାହା ଭାରତୀୟ ନାରୀର ନିଃସ୍ୱାର୍ଥପର ଚରିତ୍ରକୁ ଦର୍ଶାଏ।)

() 'ममता' कहानी का मुख्य चरित्र कौन है ? उसकी चारित्रिक विशेषताओं को बताइए

(‘ମମତା’ ଗଳ୍ପର ମୁଖ୍ୟ ଚରିତ୍ର କିଏ ? ତା’ର ଚାରିତ୍ରିକ ବୈଶିଷ୍ଟ୍ୟଗୁଡ଼ିକ ବିଷୟରେ କୁହ ।)

उत्तर: इस कहानी का मुख्य चरित्र 'ममता' है वह एक स्वाभिमानी, ईश्वर पर आस्था रखने वाली, धर्मपरायण और निश्छल ब्राह्मण कन्या है उसमें अतिथि सत्कार की भावना कूट-कूट कर भरी है, जिसके कारण वह अपने शत्रु को भी आश्रय देने से पीछे नहीं हटती

(ଉତ୍ତର: ଏହି ଗଳ୍ପର ମୁଖ୍ୟ ଚରିତ୍ର ହେଉଛି ‘ମମତା’। ସେ ଜଣେ ସ୍ୱାଭିମାନୀ, ଈଶ୍ୱରଙ୍କ ଉପରେ ବିଶ୍ୱାସ ରଖୁଥିବା, ଧର୍ମପରାୟଣ ଏବଂ ନିଷ୍କପଟ ବ୍ରାହ୍ମଣ କନ୍ୟା। ତା’ ମଧ୍ୟରେ ଅତିଥି ସତ୍କାରର ଭାବନା ଭରପୂର ହୋଇ ରହିଛି, ଯାହା ଯୋଗୁଁ ସେ ନିଜ ଶତ୍ରୁକୁ ମଧ୍ୟ ଆଶ୍ରୟ ଦେବାକୁ ପଛେଇ ନାହିଁ।)

() इस कहानी से आपको क्या प्रेरणा मिलती है ?

(ଏହି ଗଳ୍ପରୁ ଆପଣଙ୍କୁ କ’ଣ ପ୍ରେରଣା ମିଳେ ?)

उत्तर: इस कहानी से हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धर्म, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को छोड़ने की प्रेरणा मिलती है यह हमें सिखाती है कि आश्रयहीन और संकट में पड़े व्यक्ति की मदद करना हमारा परम कर्तव्य है, चाहे वह हमारा शत्रु ही क्यों हो

(ଉତ୍ତର: ଏହି ଗଳ୍ପରୁ ଆମକୁ ବିପରୀତ ପରିସ୍ଥିତିରେ ମଧ୍ୟ ନିଜ ଧର୍ମ, ନୈତିକତା ଏବଂ ମାନବୀୟ ମୂଲ୍ୟବୋଧକୁ ନ ଛାଡ଼ିବାର ପ୍ରେରଣା ମିଳିଥାଏ। ଏହା ଆମକୁ ଶିଖାଏ ଯେ ଆଶ୍ରୟହୀନ ଏବଂ ସଙ୍କଟରେ ପଡ଼ିଥିବା ବ୍ୟକ୍ତିର ସାହାଯ୍ୟ କରିବା ଆମର ପରମ କର୍ତ୍ତବ୍ୟ, ସେ ଆମର ଶତ୍ରୁ ହୋଇଥିଲେ ମଧ୍ୟ।)

() इस कहानी में लेखक का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए

(ଏହି ଗଳ୍ପରେ ଲେଖକଙ୍କ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ସ୍ପଷ୍ଟ କର ।)

उत्तर: लेखक का मुख्य उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक आदर्श 'अतिथि देवो भव' की महिमा को उजागर करना है इसके साथ ही लेखक ने इतिहास की उस क्रूर सच्चाई को भी दिखाया है जहाँ आम व्यक्ति का नि:स्वार्थ त्याग महलों और पत्थरों के नीचे दबकर गुमनाम रह जाता है

(ଉତ୍ତର: ଲେଖକଙ୍କ ମୁଖ୍ୟ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ହେଉଛି ଭାରତୀୟ ସାଂସ୍କୃତିକ ଆଦର୍ଶ ‘ଅତିଥି ଦେବୋ ଭବ’ର ମହିମାକୁ ପ୍ରକାଶ କରିବା। ଏହା ସହିତ ଲେଖକ ଇତିହାସର ସେହି କ୍ରୂର ସତ୍ୟକୁ ମଧ୍ୟ ଦେଖାଇଛନ୍ତି ଯେଉଁଠାରେ ସାଧାରଣ ବ୍ୟକ୍ତିର ନିଃସ୍ୱାର୍ଥପର ତ୍ୟାଗ ପ୍ରାସାଦ ଏବଂ ପଥର ତଳେ ଚାପି ହୋଇ ଅଜ୍ଞାତ ରହିଯାଏ।)

2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए

(ନିମ୍ନଲିଖିତ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ଗୋଟିଏ କିମ୍ବା ଦୁଇଟି ବାକ୍ୟରେ ଦିଅ ।)

() रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी हुई युवती ममता किसे देख रही थी ?

(ରୋହତାସ ଦୁର୍ଗର ପ୍ରକୋଷ୍ଠରେ ବସିଥିବା ଯୁବତୀ ମମତା କାହାକୁ ଦେଖୁଥିଲା ?)

उत्तर: रोहतास दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी हुई युवती ममता शोण नदी के तीक्ष्ण और गंभीर प्रवाह को देख रही थी

(ଉତ୍ତର: ରୋହତାସ ଦୁର୍ଗର ପ୍ରକୋଷ୍ଠରେ ବସିଥିବା ଯୁବତୀ ମମତା ଶୋଣ ନଦୀର ତୀବ୍ର ଏବଂ ଗମ୍ଭୀର ପ୍ରବାହକୁ ଦେଖୁଥିଲା।)

() ममता का यौवन किसके समान उमड़ रहा था ?

(ମତାର ଯୌବନ କାହା ସହିତ ସମାନ ହୋଇ ମାଡ଼ି ଆସୁଥିଲା ?)

उत्तर: ममता का यौवन शोण नदी के तेज़ और उमड़ते हुए प्रवाह के समान ही उमड़ रहा था

(ଉତ୍ତର: ମମତାର ଯୌବନ ଶୋଣ ନଦୀର ପ୍ରଖର ଏବଂ କୂଳଲଙ୍ଘୀ ପ୍ରବାହ ସଦୃଶ ହିଁ ମାଡ଼ି ଆସୁଥିଲା।)

() संसार में सबसे तुच्छ निराश्रय प्राणी कौन है ?

(ସଂସାରରେ ସବୁଠାରୁ ତୁଚ୍ଛ ଓ ନିରାଶ୍ରୟ ପ୍ରାଣୀ କିଏ ?)

उत्तर: तात्कालिक समाज की स्थिति के अनुसार हिंदू विधवा को संसार का सबसे तुच्छ और निराश्रय प्राणी माना गया है

(ଉତ୍ତର: ତତ୍କାଳୀନ ସମାଜର ସ୍ଥିତି ଅନୁଯାୟୀ ହିନ୍ଦୁ ବିଧବାକୁ ସଂସାରର ସବୁଠାରୁ ତୁଚ୍ଛ ଏବଂ ନିରାଶ୍ରୟ ପ୍ରାଣୀ ବୋଲି ମାନାଯାଇଛି।)

() चूड़ामणि क्यों व्यथित हो गये ?

(ଚୂଡ଼ାମଣି କାହିଁକି ବ୍ୟଥିତ ହୋଇଗଲେ ?)

उत्तर: अपनी स्नेही और इकलौती विधवा पुत्री ममता के गहरे दुःख को देखकर और उसके भविष्य के प्रति चिंतित होकर चूड़ामणि व्यथित हो गए

(ଉତ୍ତର: ନିଜର ସ୍ନେହର ଏବଂ ଏକମାତ୍ର ବିଧବା କନ୍ୟା ମମତାର ଗଭୀର ଦୁଃଖକୁ ଦେଖି ଏବଂ ତା’ର ଭବିଷ୍ୟତ ପ୍ରତି ଚିନ୍ତିତ ହୋଇ ଚୂଡ଼ାମଣି ବ୍ୟଥିତ ହୋଇଗଲେ।)

() ममता ने पिता का उपहार क्यों स्वीकार नहीं किया ?

(ମତା ପିତାଙ୍କ ଉପହାର କାହିଁକି ସ୍ୱୀକାର କଲାନାହିଁ ?)

उत्तर: क्योंकि वह उपहार पठानों द्वारा दिया गया उत्कोच (रिश्वत) था और ममता का मानना था कि अधर्म से कमाया गया सोना अनर्थ लाता है

(ଉତ୍ତର: କାରଣ ସେହି ଉପହାରଟି ପଠାନମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଦିଆଯାଇଥିବା ଉତ୍କୋଚ (ଲାଞ୍ଚ) ଥିଲା ଏବଂ ମମତାର ବିଶ୍ୱାସ ଥିଲା ଯେ ଅଧର୍ମରେ ଅର୍ଜିତ ସୁନା ଅନର୍ଥ ଆଣିଥାଏ।)

() चूड़ामणि का हृदय क्यों धक् धक् करने लगा ?

(ଚୂଡ଼ାମଣିଙ୍କ ହୃଦୟ କାହିଁକି ଧକ୍ ଧକ୍ ହେବାକୁ ଲାଗିଲା ?)

उत्तर: जब अगले दिन दुर्ग के भीतर आने वाली डोलियों का तांता लगा, तब उसमें छिपे खतरे और अनहोनी की आशंका से चूड़ामणि का हृदय धक्-धक् करने लगा

(ଉତ୍ତର: ଯେତେବେଳେ ପରଦିନ ଦୁର୍ଗ ଭିତରକୁ ଆସୁଥିବା ଡୋଲିଗୁଡ଼ିକର ଲମ୍ବା ଧାଡ଼ି ଦେଖାଗଲା, ସେତେବେଳେ ସେଥିରେ ଲୁଚି ରହିଥିବା ବିପଦ ଓ ଅଘଟଣର ଆଶଙ୍କାରେ ଚୂଡ଼ାମଣିଙ୍କ ହୃଦୟ ଧକ୍-ଧକ୍ ହେବାକୁ ଲାଗିଲା।)

() Brahmin-मन्त्री कैसे मारा गया ?

(ବ୍ରାହ୍ମଣ-ମନ୍ତ୍ରୀ କିପରି ମଲେ ?)

उत्तर: डोलियों का पर्दा हटवाने का विरोध करने पर पठानों और चूड़ामणि के बीच तलवारें खिंच गईं और इस संघर्ष में ब्राह्मण-मंत्री वहीं मारा गया

(ଉତ୍ତର: ଡୋଲିର ପରଦା ଖୋଲିବାକୁ ବିରୋଧ କରିବାରୁ ପଠାନ ଏବଂ ଚୂଡ଼ାମଣିଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଖଣ୍ଡା ଚାଲିଲା ଏବଂ ଏହି ସଂଘର୍ଷରେ ବ୍ରାହ୍ମଣ-ମନ୍ତ୍ରୀ ସେଠାରେ ହିଁ ପ୍ରାଣ ହରାଇଲେ।)

() मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्त्ति का खण्डहर कहां था ?

(ମୌର୍ଯ୍ୟ ଏବଂ ଗୁପ୍ତ ସମ୍ରାଟମାନଙ୍କ କୀର୍ତ୍ତିର ଭଗ୍ନାବଶେଷ କେଉଁଠାରେ ଥିଲା ?)

उत्तर: मौर्य और गुप्त सम्राटों की कीर्ति का खंडहर काशी के उत्तर में स्थित 'धर्मचक्र विहार' में था

(ଉତ୍ତର: ମୌର୍ଯ୍ୟ ଏବଂ ଗୁପ୍ତ ସମ୍ରାଟମାନଙ୍କ କୀର୍ତ୍ତିର ଭଗ୍ନାବଶେଷ କାଶୀର ଉତ୍ତରରେ ଅବସ୍ଥିତ ‘ଧର୍ମଚକ୍ର ବିହାର’ରେ ଥିଲା।)

() भारतीय शिल्प की विभूति कहां बिखरी हुई थी ?

(ଭାରତୀୟ ଶିଳ୍ପର ବିଭୂତି କେଉଁଠାରେ ବିକ୍ଷିପ୍ତ ହୋଇ ପଡ଼ିଥିଲା ?)

उत्तर: प्राचीन स्तूपों और विहार के ईंटों के ढेरों तथा टूटी दीवारों के बीच भारतीय शिल्प की विभूति बिखरी हुई थी

(ଉତ୍ତର: ପ୍ରାଚୀନ ସ୍ତୂପ ଏବଂ ବିହାରର ଇଟା ଗଦା ତଥା ଭଙ୍ଗା ପ୍ରାଚୀର ମଧ୍ୟରେ ଭାରତୀୟ ଶିଳ୍ପର ବିଭୂତି ବିକ୍ଷିପ୍ତ ହୋଇ ପଡ଼ିଥିଲା।)

() 'सब विधर्मी दया के पात्र नहीं' ऐसा ममता ने क्यों कहा ?

(‘ସବୁ ବିଧର୍ମୀ ଦୟାର ପାତ୍ର ନୁହନ୍ତି’ ଏପରି ମମତା କାହିଁକି କହିଲା ?)

उत्तर: शेरशाह सूरी (जो एक विधर्मी था) ने ममता के पिता की क्रूरता से हत्या की थी, इसलिए शेरशाह के प्रति घृणा के कारण उसने सभी विधर्मियों को क्रूर और दया के अयोग्य समझा

(ଉତ୍ତର: ଶେରଶାହ ସୁରୀ (ଯିଏ ଜଣେ ବିଧର୍ମୀ ଥିଲା) ମମତାର ପିତାଙ୍କୁ କ୍ରୂର ଭାବେ ହତ୍ୟା କରିଥିଲା, ତେଣୁ ଶେରଶାହ ପ୍ରତି ଥିବା ଘୃଣା ଯୋଗୁଁ ସେ ସବୁ ବିଧର୍ମୀମାନଙ୍କୁ କ୍ରୂର ଏବଂ ଦୟାର ଅଯୋଗ୍ୟ ବୋଲି ଭାବିଥିଲା।)

() स्त्री क्या विचार कर रही थी ?

(ସ୍ତ୍ରୀଲୋକଟି କ’ଣ ବିଚାର କରୁଥିଲା ?)

उत्तर: स्त्री (ममता) विचार कर रही थी कि क्या उसे अपने धर्म 'अतिथि देवो भव' का पालन करते हुए एक मुगल सैनिक को आश्रय देना चाहिए, या अपने पिता के हत्यारे की कौम के कारण उसे मना कर देना चाहिए

(ଉତ୍ତର: ସ୍ତ୍ରୀଲୋକଟି (ମମତା) ବିଚାର କରୁଥିଲା ଯେ କ’ଣ ତାକୁ ନିଜ ଧର୍ମ ‘ଅତିଥି ଦେବୋ ଭବ’ର ପାଳନ କରି ଜଣେ ମୁଗଲ ସୈନିକକୁ ଆଶ୍ରୟ ଦେବା ଉଚିତ, ନା ନିଜ ପିତାଙ୍କ ହତ୍ୟାକାରୀ ଜାତିର ହୋଇଥିବାରୁ ତାକୁ ମନା କରିଦେବା ଉଚିତ।)

() ममता ने मन में क्या कहा ?

(ମମତା ମନେ ମନେ କ’ଣ କହିଲା ?)

उत्तर: ममता ने मन में कहा कि यहाँ कोई बड़ा दुर्ग नहीं बल्कि केवल एक मामूली झोंपड़ी है, जिसे जो चाहे ले ले, पर उसे अपना पवित्र अतिथि धर्म नहीं छोड़ना चाहिए

(ଉତ୍ତର: ମମତା ମନେ ମନେ କହିଲା ଯେ ଏଠାରେ କୌଣସି ବଡ଼ ଦୁର୍ଗ ନାହିଁ ବରଂ କେବଳ ଏକ ସାଧାରଣ କୁଡ଼ିଆ ଅଛି, ଯାହାକୁ ଯିଏ ଚାହେଁ ନେଇଯାଉ, କିନ୍ତୁ ତାକୁ ନିଜର ପବିତ୍ର ଅତିଥି ଧର୍ମ ଛାଡ଼ିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ।)

() किसके प्रकाश में मुगल ने ममता का मुखमण्डल देखा ?

(କାହାର ଆଲୋକରେ ମୁଗଲ ମମତାର ମୁଖମଣ୍ଡଳ ଦେଖିଲା ?)

उत्तर: मुगल ने रात के समय चंद्रमा के मंद और शीतल प्रकाश में ममता का गरिमामय मुखमंडल देखा

(ଉତ୍ତର: ମୁଗଲ ରାତି ସମୟରେ ଚନ୍ଦ୍ରଙ୍କ ମୃଦୁ ଓ ଶୀତଳ ଆଲୋକରେ ମମତାର ମହିମାମୟ ମୁଖମଣ୍ଡଳ ଦେଖିଥିଲା।)

() ममता ने मुगल से क्या कहा ?

(ମମତା ମୁଗଲକୁ କ’ଣ କହିଲା ?)

उत्तर: ममता ने मुगल से कहा, "जाओ भीतर, थके हुए भयभीत पथिक! तुम चाहे कोई भी हो, मैं एक ब्राह्मण कुमारी होने के नाते तुम्हें आश्रय देती हूँ"

(ଉତ୍ତର: ମମତା ମୁଗଲକୁ କହିଲା, "ଯାଅ ଭିତରକୁ, କ୍ଳାନ୍ତ ଭୟଭୀତ ପଥିକ! ତୁମେ ଯିଏ ବି ହୁଅ, ମୁଁ ଜଣେ ବ୍ରାହ୍ମଣ କନ୍ୟା ହୋଇଥିବା ନାତେ ତୁମକୁ ଆଶ୍ରୟ ଦେଉଛି।")

() प्रभात में खण्डहर की सन्धि से ममता ने क्या देखा ?

(ସକାଳେ ଭଗ୍ନାବଶେଷର ସନ୍ଧିରୁ ମମତା କ’ଣ ଦେଖିଲା ?)

उत्तर: प्रभात में खंडहर के झरोखों से ममता ने देखा कि उस क्षेत्र में बहुत से मुगल अश्वारोही उस सैनिक को ढूंढते हुए घूम रहे हैं

(ଉତ୍ତର: ସକାଳେ ଭଗ୍ନାବଶେଷର ଫାଙ୍କରୁ ମମତା ଦେଖିଲା ଯେ ସେହି ଅଞ୍ଚଳରେ ଅନେକ ମୁଗଲ ଅଶ୍ୱାରୋହୀ ସେହି ସୈନିକକୁ ଖୋଜୁଥିବା ଅବସ୍ଥାରେ ବୁଲୁଛନ୍ତି।)

() किस युद्ध को बहुत दिन बीत गये ?

(କେଉଁ ଯୁଦ୍ଧକୁ ଅନେକ ଦିନ ବିତିଗଲାଣି ?)

उत्तर: शेरशाह सूरी और हुमायूँ के बीच हुए चौसा के प्रसिद्ध मुगल-पठान युद्ध को बहुत दिन बीत गए थे

(ଉତ୍ତର: ଶେରଶାହ ସୁରୀ ଏବଂ ହୁମାୟୁନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ହୋଇଥିବା ଚୌସାର ପ୍ରସିଦ୍ଧ ମୁଗଲ-ପଠାନ ଯୁଦ୍ଧକୁ ଅନେକ ଦିନ ବିତିଗଲାଣି।)

() हुमायूँ ने एक दिन कहाँ विश्राम किया था ?

(ହୁମାୟୁନ ଦିନେ କେଉଁଠାରେ ବିଶ୍ରାମ କରିଥିଲେ ?)

उत्तर: हुमायूँ ने एक रात चौसा युद्ध से भागने के बाद ममता की टूटी हुई झोंपड़ी में विश्राम किया था

(ଉତ୍ତର: ହୁମାୟୁନ ଦିନେ ଚୌସା ଯୁଦ୍ଧରୁ ପଳାୟନ କରିବା ପରେ ମମତାର ଭଙ୍ଗା କୁଡ଼ିଆରେ ବିଶ୍ରାମ କରିଥିଲେ।)

() हुमायूँ कौन था ? उसका युद्ध किससे और कहाँ हुआ ?

(ହୁମାୟୁନ କିଏ ଥିଲେ ? ତାଙ୍କର ଯୁଦ୍ଧ କାହା ସହିତ ଏବଂ କେଉଁଠାରେ ହୋଇଥିଲା ?)

उत्तर: हुमायूँ बाबर का पुत्र और एक मुगल बादशाह था, जिसका भीषण युद्ध चौसा नामक स्थान पर शेरशाह सूरी के साथ हुआ था

(ଉତ୍ତର: ହୁମାୟୁନ ବାବରଙ୍କ ପୁତ୍ର ଏବଂ ଜଣେ ମୁଗଲ ବାଦଶାହ ଥିଲେ, ଯାହାଙ୍କର ଭୟଙ୍କର ଯୁଦ୍ଧ ଚୌସା ନାମକ ସ୍ଥାନରେ ଶେରଶାହ ସୁରୀଙ୍କ ସହିତ ହୋଇଥିଲା।)

() हुमायूँ ने मिरजा से क्या करने के लिए कहा ?

(ହୁମାୟୁନ ମିରଜାଙ୍କୁ କ’ଣ କରିବା ପାଇଁ କହିଥିଲେ ?)

उत्तर: हुमायूँ ने मिरजा से उस दयालु स्त्री का घर बनवाने के लिए कहा था, जिसने संकट के समय उसे अपनी झोंपड़ी में आश्रय दिया था

(ଉତ୍ତର: ହୁମାୟୁନ ମିରଜାଙ୍କୁ ସେହି ଦୟାଳୁ ସ୍ତ୍ରୀଲୋକର ଘର ତୋଳାଇବା ପାଇଁ କହିଥିଲେ, ଯିଏ ସଙ୍କଟ ସମୟରେ ତାଙ୍କୁ ନିଜ କୁଡ଼ିଆରେ ଆଶ୍ରୟ ଦେଇଥିଲା।)

() ममता ने अश्वारोही से क्या कहा ?

(ମମତା ଅଶ୍ୱାରୋହୀକୁ କ’ଣ କହିଲା ?)

उत्तर: ममता ने अश्वारोही से कहा कि वह नहीं जानती कि वह शाहंशाह था या साधारण मुगल, पर आज वह अपनी झोंपड़ी को छोड़कर अपने चिर विश्राम-गृह (परलोक) जा रही है, अब वे चाहे यहाँ मकान बनाएँ या महल

(ଉତ୍ତର: ମମତା ଅଶ୍ୱାରୋହୀକୁ କହିଲା ଯେ ସେ ଜାଣିନାହିଁ ସେ ସାହେନସାହ ଥିଲେ ନା ସାଧାରଣ ମୁଗଲ, କିନ୍ତୁ ଆଜି ସେ ନିଜ କୁଡ଼ିଆକୁ ଛାଡ଼ି ନିଜର ଚିର ବିଶ୍ରାମ-ଗୃହ (ପରଲୋକ)କୁ ଯାଉଛି, ଏବେ ସେମାନେ ଚାହିଁଲେ ଏଠାରେ ମକାନ ତିଆରି କରନ୍ତୁ କିମ୍ବା ପ୍ରାସାଦ।)

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में दीजिए

(ନିମ୍ନଲିଖିତ ପ୍ରଶ୍ନଗۇଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ଗୋଟିଏ ଗୋଟିଏ ଶବ୍ଦରେ ଦିଅ ।)

  • () रोहतास दुर्गपति के मन्त्री कौन थे ? (ରୋହତାସ ଦୁର୍ଗପତିଙ୍କ ମନ୍ତ୍ରୀ କିଏ ଥିଲେ ?) - चूड़ामणि (ଚୂଡ଼ାମଣି)
  • () ममता किसकी पुत्री थी ? (ମମତା କାହାର କନ୍ୟା ଥିଲା ?) - चूड़ामणि (ଚୂଡ଼ାମଣି)
  • () शोण के प्रवाह में अपना जीवन मिलाने में कौन बेसुध थी ? (ଶୋଣର ପ୍ରବାହରେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ମିଶାଇବାରେ କିଏ ବେହୋସ ଥିଲା ?) - ममता (ମମତା)
  • () सुनहली सन्ध्या में किसका पीलापन विकीर्ण होने लगा ? (ସୁନେଲି ସନ୍ଧ୍ୟାରେ କାହାର ହଳଦିଆ ରଙ୍ଗ ବିଚ୍ଛୁରିତ ହେବାକୁ ଲାଗିଲା ?) - सुवर्ण/सोने का (ସୁବର୍ଣ୍ଣ/ସୁନାର)
  • () म्लेच्छ का उत्कोच किसने स्वीकार किया था ? (ମ୍ଲେଚ୍ଛର ଲାଞ୍ଚ କିଏ ସ୍ୱୀକାର କରିଥିଲେ ?) - चूड़ामणि (ଚୂଡ଼ାମଣି)
  • () कौन-से युद्ध में शेरशाह से विपन्न होकर मुगल रक्षा चाहता था ? (କେଉଁ ଯୁଦ୍ଧରେ ଶେରଶାହଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ବିପନ୍ନ ହୋଇ ମୁଗଲ ରକ୍ଷା ଚାହୁଁଥିଲା ?) - चौसा (ଚୌସା)
  • () किसने सोचा कि उसे अतिथि-देव की उपासना का पालन करना चाहिए ? (କିଏ ଭାବିଲା ଯେ ତାକୁ ଅତିଥି-ଦେବଙ୍କ ଉପାସନା ପାଳନ କରିବା ଉଚିତ ?) - ममता (ମମତା)
  • () 'भाग्य का खेल है' यह वाक्य किसने कहा ? (‘ଭାଗ୍ୟର ଖେଳ’ ଏହି ବାକ୍ୟ କିଏ କହିଥିଲା ?) - मुगल/हुमायूँ (ମୁଗଲ/ହୁମାୟୁନ)
  • () सैनिकों के खोजने पर ममता कहाँ चली गयी ? (ସୈନିକମାନେ ଖୋଜିବା ପରେ ମମତା କେଉଁଠାକୁ ଚାଲିଗଲା ?) - मृगदाव (ମୃଗଦାବ)
  • () किसका जीर्ण-कंकाल खांसी से गूंज रहा था ? (କାହାର ଜୀର୍ଣ୍ଣ-କଙ୍କାଳ କାଶରେ କମ୍ପୁଥିଲା ?) - ममता (ମମତା)
  • () ममता की सेवा के लिए गांव की कितनी स्त्रियां उसे घेर कर बैठी थीं ? (ମମତାର ସେବା ପାଇଁ ଗାଁର କେତେଜଣ ସ୍ତ୍ରୀଲୋକ ତାକୁ ଘେରି ବସିଥିଲେ ?) - दो-तीन (ଦୁଇ-ତିନି ଜଣ)
  • () कौन अवाक् खड़ा था ? (କିଏ ସ୍ତବ୍ଧ ହୋଇ ଠିଆ ହୋଇଥିଲା ?) - अश्वारोही (ଅଶ୍ୱାରୋହୀ)
  • () ममता की झोंपड़ी पर कौन-सा मन्दिर बना ? (ମମତାର କୁଡ଼ିଆ ସ୍ଥାନରେ କେଉଁ ମନ୍ଦିର ତିଆରି ହେଲା ?) - अष्टकोण (ଅଷ୍ଟକୋଣ ମନ୍ଦିର)
  • () सातों देशों का नरेश कौन था ? (ସାତ ଦେଶର ନରେଶ କିଏ ଥିଲେ ?) - हुमायूँ (ହୁମାୟୁନ)
  • () गगनचुम्बी मन्दिर किसने बनवाया ? (ଗଗନଚୁମ୍ବୀ ମନ୍ଦିର କିଏ ତିଆରି କରିଥିଲେ ?) - अकबर (ଆକବର)
  • () किसमें ममता का नाम नहीं था ? (କେଉଁଥିରେ ମମତାର ନାମ ନଥିଲା ?) - शिलालेख (ଶିଳାଲେଖରେ)
  • () किसने कहा कि 'यह महिलाओं का अपमान करना है' ? (କିଏ କହିଥିଲେ ଯେ ‘ଏହା ମହିଳାମାନଙ୍କର ଅପମାନ କରିବା’ ?) - पठानों ने (ପଠାନମାନେ)
  • () ममता को एक स्त्री ने किससे जल पिलाया ? (ମମତାକୁ ଜଣେ ସ୍ତ୍ରୀଲୋକ କେଉଁଥିରେ ପାଣି ପିଆଇଥିଲେ ?) - सीपी से (ଶାମୁକାରେ)

4. निम्नलिखित अवतरणों को पढ़कर उनका आशय स्पष्ट कीजिए

(ନିମ୍ନଲିଖିତ ପଦାବଳୀକୁ ପଢ଼ି ସେଗୁଡ଼ିକର ଆଶୟ ସ୍ପଷ୍ଟ କର ।)

() उसका यौवन शोण के समान ही उमड़ रहा था

(ତା’ର ଯୌବନ ଶୋଣ ସଦୃଶ ହିଁ ମାଡ଼ି ଆସୁଥିଲା ।)

आशय: लेखक का तात्पर्य है कि युवा विधवा ममता के मन में इच्छाओं और विचारों का तूफान ठीक उसी तरह उमड़ रहा था, जैसे रोहतास दुर्ग के नीचे शोण नदी तीव्र गति से बह रही थी दोनों में एक असीम प्रवाह और व्याकुलता थी

(ଆଶୟ: ଲେଖକଙ୍କ କହିବାର ତାତ୍ପର୍ଯ୍ୟ ହେଉଛି ଯେ ଯୁବ ବିଧବା ମମତାର ମନରେ ଇଚ୍ଛା ଏବଂ ବିଚାରର ଝଡ଼ ଠିକ୍ ସେହିପରି ମାଡ଼ି ଆସୁଥିଲା, ଯେପରି ରୋହତାସ ଦୁର୍ଗ ତଳେ ଶୋଣ ନଦୀ ତୀବ୍ର ଗତିରେ ବହିଯାଉଥିଲା। ଦୁହିଁଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଏକ ଅସୀମ ପ୍ରବାହ ଓ ବ୍ୟାକୁଳତା ଥିଲା।)

() शोण के प्रवाह में वह अपना जीवन मिलाने में बेसुध थी

(ଶୋଣର ପ୍ରବାହରେ ସେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ମିଶାଇବାରେ ବେହୋସ ଥିଲା ।)

आशय: ममता अपने जीवन के दुःखों और एकाकीपन में इतनी खोई हुई थी कि वह सामने बहती शोण नदी की तरंगों को देखते हुए अपनी सुध-बुध खो चुकी थी और उसे अपने पिता के आने का भी पता नहीं चला

(ଆଶୟ: ମମତା ନିଜ ଜୀବନର ଦୁଃଖ ଏବଂ ଏକାକୀପଣରେ ଏତେ ହଜି ଯାଇଥିଲା ଯେ ସେ ସାମ୍ନାରେ ବହିଯାଉଥିବା ଶୋଣ ନଦୀର ତରଙ୍ଗକୁ ଦେଖି ନିଜର ସୁଧବୁଧ ହରାଇ ବସିଥିଲା ଏବଂ ତା’ ପିତାଙ୍କ ଆସିବା ମଧ୍ୟ ଜାଣିପାରିଲାନାହିଁ।)

() इस पतनोन्मुख प्राचीन सामन्त वंश का अंत समीप है

(ଏହି ପତନୋନ୍ମୁଖ ପ୍ରାଚୀନ ସାମନ୍ତ ବଂଶର ଅନ୍ତ ନିକଟବର୍ତ୍ତୀ ।)

आशय: मंत्री चूड़ामणि दूरदर्शी थे, वे जानते थे कि रोहतास दुर्ग का पुराना सामंत साम्राज्य अब कमजोर हो चुका है और शेरशाह सूरी कभी भी इस पर कब्ज़ा कर सकता है, जिससे उनका मंत्री पद भी समाप्त हो जाएगा

(ଆଶୟ: ମନ୍ତ୍ରୀ ଚୂଡ଼ାମଣି ଦୂରଦର୍ଶୀ ଥିଲେ, ସେ ଜାଣିଥିଲେ ଯେ ରୋହତାସ ଦୁର୍ଗର ପୁରୁଣା ସାମନ୍ତ ସାମ୍ରାଜ୍ୟ ଏବେ ଦୁର୍ବଳ ହୋଇଯାଇଛି ଏବଂ ଶେରଶାହ ସୁରୀ ଯେକୌଣସି ସମୟରେ ଏହାକୁ ଅଧିକାର କରିପାରେ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ତାଙ୍କର ମନ୍ତ୍ରୀ ପଦ ମଧ୍ୟ ଶେଷ ହୋଇଯିବ।)

() परन्तु तुम भी वैसे ही क्रूर हो वही भीषण रक्त की प्यास, वही निष्ठुर प्रतिबिम्ब तुम्हारे मुख पर भी है

(କିନ୍ତୁ ତୁମେ ମଧ୍ୟ ସେହିପରି କ୍ରୂର। ସେହି ଭୟଙ୍କର ରକ୍ତର ଶୋଷ, ସେହି ନିଷ୍ଠୁର ପ୍ରତିବିମ୍ବ ତୁମ ମୁହଁରେ ମଧ୍ୟ ଅଛି।)

आशय: जब एक घायल मुगल (हुमायूँ) ने ममता से आश्रय माँगा, तो ममता ने उसके चेहरे के हिंसक भावों को देखकर कहा कि वह भी अन्य क्रूर आक्रमणकारियों जैसा ही है, जिनके भीतर दया नहीं बल्कि केवल युद्ध और रक्तपात की प्यास होती है

(ଆଶୟ: ଯେତେବେଳେ ଜଣେ ଆହତ ମୁଗଲ (ହୁମାୟୁନ) ମମତା ପାଖରୁ ଆଶ୍ରୟ ମାଗିଲା, ସେତେବେଳେ ମମତା ତା’ ମୁହଁର ହିଂସ୍ର ଭାବକୁ ଦେଖି କହିଲା ଯେ ସେ ମଧ୍ୟ ଅନ୍ୟ କ୍ରୂର ଆକ୍ରମଣକାରୀମାନଙ୍କ ଭଳି, ଯାହାଙ୍କ ଭିତରେ ଦୟା ନଥାଏ ବରଂ କେବଳ ଯୁଦ୍ଧ ଓ ରକ୍ତପାତର ଶୋଷ ଥାଏ।)

() मैं ब्राह्मण-कुमारी हूँ, सब अपना धर्म छोड़ दें तो मैं भी क्यों छोड़ दूँ ?

(ମୁଁ ବ୍ରାହ୍ମଣ-କନ୍ୟା, ସମସ୍ତେ ଯଦି ନିଜ ଧର୍ମ ଛାଡ଼ିଦେବେ ତେବେ ମୁଁ କାହିଁକି ଛାଡ଼ିବି ?)

आशय: ममता का चरित्र धर्मपरायण है वह कहती है कि भले ही संसार के अन्य लोग (जैसे आक्रमणकारी) मानवता और नैतिकता का धर्म भूल चुके हों, लेकिन वह एक ब्राह्मण कन्या होने के नाते शरण आए अतिथि की रक्षा करने के अपने पवित्र धर्म को नहीं छोड़ सकती

(ଆଶୟ: ମମତାର ଚରିତ୍ର ଧର୍ମପରାୟଣ। ସେ କହୁଛି ଯେ ସଂସାରର ଅନ୍ୟ ଲୋକମାନେ (ଯେପରି ଆକ୍ରମଣକାରୀମାନେ) ମାନବିକତା ଏବଂ ନୈତିକତାର ଧର୍ମ ଭୁଲିଯାଇଥାଇ ପାରନ୍ତି, କିନ୍ତୁ ସେ ଜଣେ ବ୍ରାହ୍ମଣ କନ୍ୟା ହୋଇଥିବା ହେତୁ ଶରଣାଗତ ଅତିଥିର ରକ୍ଷା କରିବାର ନିଜର ପବିତ୍ର ଧର୍ମକୁ ଛାଡ଼ିପାରିବ ନାହିଁ।)

() उस स्त्री को मैं कुछ भी दे सका

(ସେହି ସ୍ତ୍ରୀଲୋକଟିକୁ ମୁଁ କିଛି ହେଲେ ଦେଇପାରିଲି ନାହିଁ।)

आशय: हुमायूँ सुबह जाते समय ग्लानि महसूस कर रहा था कि जिस महिला ने अपनी जान जोखिम में डालकर उसे रात भर आश्रय दिया, वह बदले में उसकी दरिद्रता के कारण उसे कुछ भी इनाम या सहायता नहीं दे पाया

(ଆଶୟ: ହୁମାୟୁନ ସକାଳେ ଯିବା ସମୟରେ ଅନୁତାପ କରୁଥିଲେ ଯେ ଯେଉଁ ମହିଳା ଜଣକ ନିଜ ଜୀବନକୁ ବିପଦରେ ପକାଇ ତାଙ୍କୁ ରାତିସାରା ଆଶ୍ରୟ ଦେଲେ, ସେ ବଦଳରେ ନିଜର ଅସହାୟତା ଯୋଗୁଁ ତାଙ୍କୁ କୌଣସି ପୁରସ୍କାର ବା ସାହାଯ୍ୟ ଦେଇପାରିଲେ ନାହିଁ।)

() अब तुम इसका मकान बनाओ या महल, मैं अपने चिर विश्राम गृह में जाती हूँ

(ଏବେ ତୁମେ ଏହାକୁ ମକାନ ତିଆରି କର କି ପ୍ରାସାଦ, ମୁଁ ମୋର ଚିର ବିଶ୍ରାମ ଗୃହକୁ ଯାଉଛି।)

आशय: मृत्यु के करीब पहुँच चुकी वृद्ध ममता अश्वारोही से कहती है कि वह जीवन भर अपनी झोंपड़ी छिन जाने के डर से डरती रही, पर अब भगवान ने उसकी सुन ली है और वह इस नश्वर संसार को छोड़कर परलोक (चिर विश्राम गृह) जा रही है; अब उसके बाद वे उस स्थान का जो चाहें करें

(ଆଶୟ: ମୃତ୍ୟୁ ଶଯ୍ୟାରେ ପଡ଼ିଥିବା ବୃଦ୍ଧା ମମତା ଅଶ୍ୱାରୋହୀକୁ କହୁଛି ଯେ ସେ ସାରା ଜୀବନ ନିଜ କୁଡ଼ିଆ ହରାଇବା ଭୟରେ ଭୟଭୀତ ଥିଲା, କିନ୍ତୁ ଏବେ ଭଗବାନ ତା’ କଥା ଶୁଣିଛନ୍ତି ଏବଂ ସେ ଏହି ନଶ୍ୱର ସଂସାର ଛାଡ଼ି ପରଲୋକ (ଚିର ବିଶ୍ରାମ ଗୃହ)କୁ ଯାଉଛି; ଏବେ ତା’ ପରେ ସେମାନେ ସେହି ସ୍ଥାନର ଯାହା ଇଚ୍ଛା ତାହା କରନ୍ତୁ।)

5. निम्नलिखित वाक्यों को 'किसने' और 'किससे' कहा ?

(ନିମ୍ନଲିଖିତ ବାକ୍ୟଗୁଡ଼ିକୁ ‘କିଏ’ ଏବଂ ‘କାହାକୁ’ କହିଥିଲେ ?)

() क्या आपने म्लेच्छ का उत्कोच स्वीकार कर लिया ?

  • किसने कहा: ममता ने (ମମତା କହିଥିଲା)
  • किससे कहा: अपने पिता चूड़ामणि से (ନିଜ ପିତା ଚୂଡ଼ାମଣିଙ୍କୁ)

() यह महिलाओं का अपमान करना है

  • किसने कहा: पठानों ने (ଠାନମାନେ କହିଥିଲେ)
  • किससे कहा: चूड़ामणि से (ଚୂଡ଼ାମଣିଙ୍କୁ)

() माता, मुझे आश्रय चाहिए

  • किसने कहा: एक घायल मुगल (हुमायूँ) ने (ଜଣେ ଆହତ ମୁଗଲ (ହୁମାୟୁନ) କହିଥିଲେ)
  • किससे कहा: ममता से (ମମତାଙ୍କୁ)

() गला सूख रहा है, साथी छूट गये हैं, अश्व गिर पड़ा है

  • किसने कहा: मुगल (हुमायूँ) ने (ମୁଗଲ (ହୁମାୟୁନ) କହିଥିଲେ)
  • किससे कहा: ममता से (ମମତାଙ୍କୁ)

() उस स्त्री को मैं कुछ भी दे सका

  • किसने कहा: हुमायूँ ने (ହୁମାୟୁନ କହିଥିଲେ)
  • किससे कहा: मिरजा से (ମିରଜାଙ୍କୁ)

भाषा - ज्ञान (ଭାଷା - ଜ୍ଞାନ)

1. तत्सम शब्द और उनके अर्थ (ତତ୍ସମ ଶବ୍ଦ ଏବଂ ସେଗୁଡ଼ିକର ଅର୍ଥ):

पाठ में प्रयुक्त तत्सम शब्दों की सूची और उनके अर्थ नीचे दिए गए हैं:

  • प्रकोष्ठ: मुख्य द्वार के पास का कमरा / बड़ा कमरा (ବଡ଼ କୋଠରୀ / ପ୍ରବେଶ କକ୍ଷ)
  • दुहिता: पुत्री / बेटी (କନ୍ୟା / ଝିଅ)
  • उत्कोच: घूस / रिश्वत (ଲାଞ୍ଚ)
  • विपद: आपत्ति / संकट (ବିପତ୍ତି / ସଙ୍କଟ)
  • भग्नावशेष: खंडहर / टूटा हुआ हिस्सा (ଭଗ୍ନାବଶେଷ)
  • कपाट: दरवाजा / किवाड़ (କବାଟ)
  • आततायी: अन्यायी / अत्याचारी (ଅତ୍ୟାଚାରୀ / ଶତ୍ରୁ)

2. लिंग पहचान और वाक्य (ଲିଙ୍ଗ ନିରୂପଣ ଏବଂ ବାକ୍ୟ):

रेखांकित शब्दों के आधार पर लिंग निर्धारण:

  • मन में वेदना उमड़ रही थी -> वेदना: स्त्रीलिंग (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ)
  • स्वर्ण का पीलापन सुंदर था -> पीलापन: पुल्लिंग (ପୁଂଲିଙ୍ଗ)
  • वह झोंपड़ी में रहती थी -> झोंपड़ी: स्त्रीलिंग (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ)
  • सैनिकों ने तोरण पर पहरा दिया -> तोरण: पुल्लिंग (ପୁଂଲିଙ୍ଗ)

3. विराम चिह्न लगाइए (ବିରାମ ଚିହ୍ନ ଲଗାଅ):

वाक्य: "मैं नहीं जानती कि वह शाहंशाह था या साधारण मुगल, पर एक दिन इसी झोंपड़ी के नीचे वह रहा था मैंने सुना था, वह मेरा घर बनाने की आज्ञा दे गया था मैं आजीवन अपनी झोंपड़ी खुदवाने के डर से भयभीत रही थी"

4. उपसर्ग एवं प्रत्यय-युक्त शब्दों के मूल शब्द (ଉପସର୍ଗ ଏବଂ ପ୍ରତ୍ୟୟ-ଯୁକ୍ତ ଶବ୍ଦର ମୂଳ ଶବ୍ଦ):

  • प्रकोष्ठ: 'प्र' (उपसर्ग) + कोष्ठ (मूल शब्द)
  • निराश्रय: 'निः/निर' (उपसर्ग) + आश्रय (मूल शब्द)
  • पतनोन्मुख: पतन (मूल शब्द) + 'उन्मुख' (प्रत्यय)
  • आजीवन: '' (उपसर्ग) + जीवन (मूल शब्द)