प्रश्न और अभ्यास (ପ୍ରଶ୍ନ ଓ ଅଭ୍ୟାସ)
1. इन प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए (ଏହି ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ୨-୩ଟି ବାକ୍ୟରେ ଦିଅ)
(क) कवि दुःख से न घबराने को क्यों कहते हैं ?
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: କବି ଦୁଃଖରେ ନ ଘାବରେଇବା
ପାଇଁ କାହିଁକି କହିଛନ୍ତି?
- उत्तर: कवि दुःख से न घबराने को इसलिए कहते हैं क्योंकि दुःख जीवन की एक प्रबल परीक्षा का क्षण है और यह सर्वदा नहीं रहता। दुःख से हार जाने वाला इंसान कहलाने योग्य नहीं होता। यदि हम दुःख से डरते नहीं हैं और उसे मन से स्वीकार नहीं करते, तो वही दुःख फिर सुख बन जाता है।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: କବି ଦୁଃଖରେ ନ ଘାବରେଇବା
ପାଇଁ ଏଥିପାଇଁ କହିଛନ୍ତି କାରଣ ଦୁଃଖ ହେଉଛି ଜୀବନର ଏକ ପ୍ରବଳ ପରୀକ୍ଷାର ମୁହୂର୍ତ୍ତ ଏବଂ
ଏହା ସଦାସର୍ବଦା ରହେନାହିଁ। ଦୁଃଖ ପାଖରେ ହାରିଯାଉଥିବା ମଣିଷ, ମଣିଷ ପଦବାଚ୍ୟ ନୁହେଁ।
ଯଦି ଆମେ ଦୁଃଖକୁ ଡରିବା ନାହିଁ ଏବଂ ତାକୁ ମନର ଦୁର୍ବଳତା ବୋଲି ଭାବିବା ନାହିଁ, ତେବେ ସେହି ଦୁଃଖ ହିଁ
ପୁଣି ସୁଖ ପାଲଟିଯାଏ।
(ख) इस कविता का संदेश क्या है- समझाइए ।
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: ଏହି କବିତାର ସନ୍ଦେଶ କଣ-
ବୁଝାଇ ଦିଅ।
- उत्तर: इस कविता का संदेश यह है कि मानव जीवन में दुःख से घबराना या भागना नहीं चाहिए, बल्कि उसका साहसपूर्वक सामना करना चाहिए। जिस प्रकार लोहा जलती ज्वाला में जलकर ही लाल और शुद्ध होकर निकलता है, उसी प्रकार मानव दुःख रूपी संघर्षों से तपकर ही श्रेष्ठ बनता है। दुःख को मुक्ति का मार्ग मानना चाहिए।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: ଏହି କବିତାର ସନ୍ଦେଶ ଏହା
ଯେ ମାନବ ଜୀବନରେ ଦୁଃଖକୁ ଦେଖି ଘାବରେଇବା ବା ଦୌଡ଼ି ପଳାଇବା ଉଚିତ ନୁହେଁ, ବରଂ ସାହସର ସହ ତାର
ସମ୍ମୁଖୀନ ହେବା ଉଚିତ। ଯେପରି ଲୁହା ଜଳନ୍ତା ନିଆଁରେ ଜଳିବା ପରେ ହିଁ ଲାଲ୍ ଏବଂ ଶୁଦ୍ଧ
ହୋଇ ବାହାରିଥାଏ, ସେହିପରି ମଣିଷ ଦୁଃଖ
ରୂପୀ ସଂଘର୍ଷରେ ଗଢ଼ି ହେବା ପରେ ହିଁ ଶ୍ରେଷ୍ଠ ବନିଥାଏ। ଦୁଃଖକୁ ମୁକ୍ତିର ମାର୍ଗ ବୋଲି
ଭାବିବା ଉଚିତ।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए (ନିମ୍ନଲିଖିତ ପ୍ରଶ୍ନଗୁଡ଼ିକର ଉତ୍ତର ଗୋଟିଏ କିମ୍ବା ଦୁଇଟି ବାକ୍ୟରେ
ଦିଅ)
:
(क) कवि ने मुक्ति का बंधन किसे माना है ?
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: କବି ମୁକ୍ତିର ବନ୍ଧନ
କାହାକୁ ମାନିଛନ୍ତି?
- उत्तर: कवि ने दुःख को ही कठिन मुक्ति का बंधन माना है।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: କବି ଦୁଃଖକୁ ହିଁ କଠିନ
ମୁକ୍ତିର ବନ୍ଧନ ବୋଲି ମାନିଛନ୍ତି।
(ख) जीवन के लम्बे पथ पर कौन साथ-साथ चलते हैं ?
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: ଜୀବନର ଲମ୍ବା ପଥରେ କିଏ
ସାଥୀ ହୋଇ ଚାଲନ୍ତି?
- उत्तर: जीवन के लम्बे पथ पर सुख और दुःख दोनों साथ-साथ चलते हैं।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: ଜୀବନର ଲମ୍ବା ପଥରେ ସୁଖ
ଏବଂ ଦୁଃଖ ଦୁହେଁ ସାଥୀ ହୋଇ ଚାଲନ୍ତି।
(ग) जीवन की मंजिल तक कौन जाता है ?
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: ଜୀବନର ମଞ୍ଜିଲ୍
(ଲକ୍ଷ୍ୟ) ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ କିଏ ଯାଏ?
- उत्तर: जीवन की मंजिल तक दुःख जाता है, जबकि सुख पीछे रह जाया करता है।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: ଜୀବନର ମଞ୍ଜିଲ୍
ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଦୁଃଖ ଯାଇଥାଏ, ଯେତେବେଳେ କି ସୁଖ ପଛରେ ରହିଯାଏ।
(घ) जीवन में हलचल कौन लाता है ?
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: ଜୀବନରେ ହଲଚଲ୍ (ଆଲୋଡନ)
କିଏ ଆଣିଥାଏ?
- उत्तर: जीवन में हलचल दुःख लाता है।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: ଜୀବନରେ ହଲଚଲ୍ ଦୁଃଖ
ଆଣିଥାଏ।
(ङ) जलती ज्वाला में जलकर क्या लाल बन निकलता है ?
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: ଜଳନ୍ତା ନିଆଁର ଶିଖାରେ
ଜଳି କଣ ଲାଲ୍ ହୋଇ ବାହାରିଥାଏ?
- उत्तर: जलती ज्वाला में जलकर लोहा लाल निकल आता है।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: ଜଳନ୍ତା ନିଆଁର ଶିଖାରେ
ଜଳି ଲୁହା ଲାଲ୍ ହୋଇ ବାହାରିଥାଏ।
(च) कवि ने किसे धन्यवाद देने को कहा है ?
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: କବି କାହାକୁ ଧନ୍ୟବାଦ
ଦେବା ପାଇଁ କହିଛନ୍ତି?
- उत्तर: कवि ने उस ईश्वर या परिस्थिति को धन्यवाद देने को कहा है जिसने जीवन में दुःख के सपने दिए हैं।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: କବି ସେହି ଈଶ୍ୱର ବା
ପରିସ୍ଥିତିକୁ ଧନ୍ୟବାଦ ଦେବାକୁ କହିଛନ୍ତି ଯିଏ ଜୀବନରେ ଦୁଃଖର ସ୍ୱପ୍ନ ଦେଇଛନ୍ତି।
(छ) दुःख कब सुख बन जाता है ?
- ଓଡ଼ିଆ ଅର୍ଥ: ଦୁଃଖ କେତେବେଳେ ସୁଖ
ପାଲଟିଯାଏ?
- उत्तर: यदि मनुष्य दुःख को दुःख न माने (उसे अपने मन पर हावी न होने दे), तो दुःख ही फिर सुख बन जाता है।
- ଓଡ଼ିଆ ଉତ୍ତର: ଯଦି ମଣିଷ ଦୁଃଖକୁ ଦୁଃଖ
ବୋଲି ନ ମାନେ (ତାକୁ ମନର ଦୁର୍ବଳତା ନ ଭାବେ), ତେବେ ଦୁଃଖ ହିଁ ପୁଣି ସୁଖ ପାଲଟିଯାଏ।
3. पंक्तियाँ पूरा कीजिए (ପଙ୍କ୍ତିଗୁଡ଼ିକୁ ପୂରଣ କର)
:
कविता के आधार पर रिक्त स्थानों की पूर्ति (କବିତା ଆଧାରରେ ଶୂନ୍ୟସ୍ଥାନ ପୂରଣ):
(क) जीवन के लम्बे पथ पर जब सुख दुःख चलते साथ-साथ तब
(ख) दुःख जीवन में करता हलचल, वह मन की दुर्बलता केवल ।
(ग) जलती ज्वाला में जलकर ही लोहा लाल निकल आता है ।
(घ) एक समय है जब सुख ही क्या ! दुःख भी साथ न दे पाता है ।
4. सही अर्थ चुनिए (ସଠିକ୍ ଅର୍ଥ ବାଛ)
:
(क) प्रबल परीक्षा का क्षण क्या है ?
- (i) सुख (ii) दुःख (iii) आनंद
- उत्तर: (ii) दुःख
(ख) किसमें जलकर ही लोहा लाल निकल आता है ?
- (i) दुःख में (ii) सुख में (iii) जलती ज्वाला में
- उत्तर: (iii) जलती ज्वाला में
भाषा ज्ञान (ଭାଷା ଜ୍ଞାନ)
1. विपरीत अर्थवाले शब्द लिखिए (ବିପରୀତ ଅର୍ଥବୋଧକ ଶବ୍ଦ ଲେଖ)
:
- कठिन $\times$
सरल (ସରଳ)
- बंधन $\times$
मुक्ति (ମୁକ୍ତି) / मोक्ष
- दुर्बलता $\times$ सबलता (ସବଳତା)
- दुःख $\times$
सुख (ସୁଖ)
- मुक्ति $\times$ बंधन (ବନ୍ଧନ)
- हार $\times$
जीत (ଜିତ) / विजय
2. इन शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए (ଏହି ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକୁ ବାକ୍ୟରେ ପ୍ରୟୋଗ କର)
:
- परीक्षा: जीवन में आने वाला दुःख हमारी धैर्य की प्रबल परीक्षा लेता है।
- समय: समय बहुत बलवान होता है, यह हमेशा एक सा नहीं रहता।
- मंजिल: कठिन परिश्रम करने वाले लोग अपनी मंजिल तक ज़रूर पहुँचते हैं।
- बंधन: प्रेम का बंधन संसार में सबसे मजबूत होता है।
3. लिंग बताइए (ଲିଙ୍ଗ ନିରୂପଣ କର)
:
हिन्दी व्याकरण के अनुसार लिंग भेद (ହିନ୍ଦୀ ବ୍ୟାକରଣ ଅନୁସାରେ ଲିଙ୍ଗ):
- लोहा - पुल्लिंग (ପୁଂଲିଙ୍ଗ)
- आग - स्त्रीलिंग (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ)
- हार - पुल्लिंग (ପୁଂଲିଙ୍ଗ) (पराजय के अर्थ में यह स्त्रीलिंग भी होता है, पर सामान्यतः पुल्लिंग रूप प्रभावी रहता है)
- ज्वाला - स्त्रीलिंग (ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ)
- पथ - पुल्लिंग (ପୁଂଲିଙ୍ଗ)
- दुःख - पुल्लिंग (ପୁଂଲିଙ୍ଗ)
4. बहुवचन रूप लिखिए (ବହୁବଚନ ରୂପ ଲେଖ)
:
- एक = अनेक (ଅନେକ)
- परीक्षा = परीक्षाएँ (ପରୀକ୍ଷାଗୁଡ଼ିକ)
- सपना = सपने (ସ୍ୱପ୍ନଗୁଡ଼ିକ)
- मंजिल = मंजिलें (ଲକ୍ଷ୍ୟଗୁଡ଼ିକ)
5. निम्न वाक्यों में विशेषणों को रेखांकित कीजिए (ନିମ୍ନ ବାକ୍ୟଗୁଡ଼ିକରେ ବିଶେଷଣ ପଦକୁ ଚିହ୍ନିତ କର)
:
(यहाँ विशेषण शब्दों को बोल्ड (Bold) कर दिया गया है)
(क) कोयल की आवाज़ सुरीली होती है । (विशेषण: सुरीली - गुणवाचक विशेषण)
(ख) मुझे पाँच रुपये चाहिए । (विशेषण: पाँच - संख्यावाचक विशेषण)
(ग) हमें गरीब जनता की सेवा करनी चाहिए । (विशेषण: गरीब - गुणवाचक विशेषण)
(घ) रमेश एक मेधावी छात्र है । (विशेषण: मेधावी - गुणवाचक विशेषण)